Friday, 5 May 2017

एकाग्रता

एक बार स्वामी विवेकानंद नदी के किनारे बैठे थे, वही एक व्यक्ति बंदूक से निशाना लगा रहा था। हर बार निशाना चूक जाता।

यह देख स्वामी जी मुस्करा दिए उन्हें मुस्कराता देख, निशानची चिढ़ते हुए बोला, मुस्करा तो ऐसे रहे हो जैसे निशाना लगा लोगे, बंदूक चलाई है ?

सही है, कभी नहीं कहते हुए स्वामी जी ने उससे बंदूक हाथ में लेकर उन्होंने सटीक निशाने लगा दिए फिर बोले, निशाने एकाग्रता से लगते है।

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