Sunday 11 June 2017

कर्म की गति

"कर्म की गति"
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एक कारोबारी सेठ सुबह सुबह जल्द बाजी में घर से बाहर निकल कर ऑफिस जाने के लिए कार का दरवाजा खोल कर जैसे ही बैठने जाता है,
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उसका पाँव गाड़ी के नीचे बैठे कुत्ते  की पूँछ पर पड़ जाता है। 
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दर्द से बिलबिलाकर अचानक हुए इस वार को घात समझ वह कुत्ता उसे जोर से काट खाता है।
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गुस्से में आकर सेठ आसपास पड़े 10-12 पत्थर कुत्ते की ओर फेंक मारता है पर भाग्य से एक भी पत्थर उसे नहीं लगता है और वह कुत्ता भाग जाता है।
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जैसे तैसे सेठजी अपना इलाज करवा कर  ऑफिस पहुँचते हैं जहां उन्होंने अपने  मातहत मैनेजर्स की बैठक बुलाई होती है।
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यहाँ अनचाहे ही कुत्ते पर आया उनका सारा गुस्सा उन बिचारे प्रबन्धकों पर उतर जाता है।
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वे प्रबन्धक भी मीटिंग से बाहर आते ही एक दूसरे पर भड़क जाते हैं -
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बॉस ने बगैर किसी वाजिब कारण के डांट जो दिया था।
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अब दिन भर वे लोग ऑफिस में अपने नीचे काम करने वालों पर अपनी खीज निकलते हैं –
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ऐसे करते करते आखिरकार सभी का गुस्सा अंत में ऑफिस के चपरासी पर निकलता है जो मन ही मन बड़बड़ाते हुए भुनभुनाते हुए घर चला जाता है।
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घंटी की आवाज़ सुन कर उसकी पत्नी दरवाजा खोलती है और हमेशा की तरह पूछती है
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“आज फिर देर हो गई आने में........”

वो लगभग चीखते हुए कहता है “मै क्या ऑफिस कंचे खेलने जाता हूँ ?

काम करता हूँ, दिमाग मत खराब करो मेरा, पहले से ही पका हुआ हूँ, चलो खाना परोसो”
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अब गुस्सा होने की बारी पत्नी की थी,
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रसोई मे काम करते वक़्त बीच बीच में आने पर वह पति का गुस्सा अपने बच्चे पर उतारते हुए उसे जमा के तीन चार थप्पड़ रसीद कर देती है।
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अब बेचारा बच्चा जाए तो जाये कहाँ, घर का ऐसा बिगड़ा माहौल देख, बिना कारण अपनी माँ की मार खाकर वह रोते रोते बाहर का रुख करता है,
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एक पत्थर उठाता है और सामने जा रहे कुत्ते को पूरी ताकत से दे मारता है।
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कुत्ता फिर बिलबिलाता है ........!!
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दोस्तों ये वही सुबह वाला कुत्ता था !!!
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अरे भई उसको उसके काटे के बदले ये पत्थर तो पड़ना ही था
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केवल समय का फेर था और सेठ जी की जगह इस बच्चे से पड़ना था !!!
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उसका कार्मिक चक्र तो पूरा होना ही था ना !!!
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इसलिए मित्र यदि कोई आपको काट खाये, चोट पहुंचाए और आप उसका कुछ ना कर पाएँ, तो निश्चिंत रहें,
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उसे चोट तो लग के ही रहेगी, बिलकुल लगेगी, जो आपको चोट पहुंचाएगा, उस का तो चोटिल होना निश्चित ही है,
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कब होगा किसके हाथों होगा ये केवल ऊपरवाला जानता है पर होगा ज़रूर ,
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अरे भई .... ये तो सृष्टी का नियम है !!!

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